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जिन गाड़ियों की नीलामी प्रक्रिया 90 दिन के बाद हो जानी चाहिए थी, उन गाड़ियों की बोली अब कबाड़ के भाव लगेगी. दरअसल सीज किए गए वाहन नोटिन देने के बाद 10 माह के भीतर वाहन मालिकों को ले जाने होते हैं और अगर ऐसा नहीं किया जाता है तो परिवहन विभाग उन वाहनों को नीलाम कर देता है.from Latest News उत्तराखंड News18 हिंदी http://bit.ly/2RshfbU

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