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भोजपुरी के माटी से निकल के दिल्ली के जवाहर लाल यूनिवर्सिटी में पढ़ावत हिंदी साहित्य के समृद्ध करे वाला केदारनाथ सिंह वही तरे बाने, जइसन अपना कविता में लिखले रहले - …. किसी किवाड़ पर, हाथ के निशान की तरह.... आखिर दुआरि खोले से पहले उ निशान देखहीं के पड़ेला.from Latest News उत्तर प्रदेश News18 हिंदी https://ift.tt/3aZtn1K

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